Poetry: मस्तानी शाम Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps - May 29, 2021 मस्तानी शाम थी, शाम से बढ़कर नजारा था; नजारे से बढ़कर वह लम्हा था, लम्हे से बढ़कर ओ पल थे; -BSK Read more